वीडियो बीच में अटकता है, डाउनलोड रेंगता है — और इंटरनेट कंपनी कहती है "सब ठीक है"। सच यह है कि धीमे WiFi की वजह अक्सर आपका प्लान नहीं, बल्कि राउटर की गलत जगह या सेटिंग होती है। ये 10 उपाय आज़माएं।

राउटर की जगह बदलें — सबसे बड़ा फर्क

राउटर को घर के बीचों-बीच, ऊंची जगह (शेल्फ) पर रखें — फर्श पर या दीवार के कोने में सिग्नल आधा रह जाता है। मोटी दीवारें, धातु की अलमारी और माइक्रोवेव सिग्नल खाते हैं; राउटर इनसे दूर रखें। एंटीना को एक सीधा, एक आड़ा रखें।

सही बैंड और चैनल चुनें

राउटर में दो बैंड होते हैं: 2.4GHz (दूर तक, धीमा) और 5GHz (नज़दीक, तेज़)। फोन-लैपटॉप को 5GHz से जोड़ें। पड़ोसियों के राउटर से टकराव हो तो राउटर सेटिंग में WiFi चैनल बदलें — 1, 6 या 11 में से सबसे खाली वाला चुनें।

डिवाइस और ऐप्स की सफाई

बैकग्राउंड में चल रहे क्लाउड बैकअप, ऑटो-अपडेट और टोरेंट स्पीड खा जाते हैं — ज़रूरत न हो तो रोकें। पुराने फोन जो धीमे WiFi स्टैंडर्ड पर हैं, पूरे नेटवर्क को धीमा करते हैं। राउटर को महीने में एक बार रीस्टार्ट करें — यह छोटा काम बड़ा फर्क लाता है।

कब अपग्रेड करें

अगर घर बड़ा है तो एक राउटर काफी नहीं — मेश WiFi सिस्टम लें। 5 साल से पुराना राउटर बदल दें; नया स्टैंडर्ड (WiFi 6) भीड़ में भी तेज़ रहता है। और हां, पहले स्पीड टेस्ट करके देखें — कभी-कभी कंपनी वादे की आधी स्पीड ही दे रही होती है।

इनमें से आधे उपाय भी अपना लिए तो बफरिंग वाला "घूमता गोला" इतिहास बन जाएगा। आज ही राउटर की जगह से शुरुआत करें।