फ्लाइट टिकट बुक, होटल बुक — सब तैयार। लेकिन अगर सफर में तबीयत खराब हो जाए, ट्रिप कैंसिल करनी पड़े या सामान खो जाए? इन्हीं "अगर" से बचाने के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस होता है।

क्या-क्या कवर होता है

अच्छी पॉलिसी में ये शामिल होते हैं: मेडिकल इमरजेंसी (विदेश में इलाज बेहद महंगा होता है), ट्रिप कैंसिलेशन या बीच में वापसी, बैगेज खोना या देरी से मिलना, फ्लाइट डिले, और इमरजेंसी इवैक्यूएशन। मेडिकल कवर सबसे अहम है — विदेश में अस्पताल का एक दिन का खर्च लाखों में पहुंच सकता है।

कब वाकई ज़रूरी है

विदेश यात्रा में तो लगभग हमेशा लें। इसके अलावा इन मामलों में बिल्कुल न छोड़ें: महंगी ट्रिप (लाखों का पैकेज), बुज़ुर्ग या बीमार यात्री, और एडवेंचर एक्टिविटी (स्कीइंग, ट्रेकिंग, स्कूबा)। घरेलू छोटी ट्रिप में कभी-कभी क्रेडिट कार्ड का बिल्ट-इन ट्रैवल कवर काफी होता है — कार्ड की शर्तें चेक कर लें।

पॉलिसी की तुलना कैसे करें

सिर्फ प्रीमियम (कीमत) न देखें — तीन चीज़ें ज़रूर मिलाएं: कवर राशि (विदेश के लिए मेडिकल कवर कम से कम $50,000), डिडक्टिबल (क्लेम में आपको खुद कितना देना होगा), और क्लेम की प्रक्रिया कितनी आसान है। ऑनलाइन तुलना करें और असली ग्राहकों के रिव्यू पढ़ें। परिवार के साथ जा रहे हैं तो फैमिली प्लान अक्सर अलग-अलग पॉलिसी से सस्ता पड़ता है।

एक्सक्लूज़न (बहिष्करण) ध्यान से पढ़ें

पहले से मौजूद बीमारी (pre-existing disease) आमतौर पर कवर नहीं होती — इसके लिए अलग राइडर लेना पड़ता है। शराब या नशे की हालत में हुआ हादसा, बिना राइडर के खतरनाक खेल, और "पहले से ज्ञात घटना" (जैसे घोषित तूफ़ान के बाद खरीदी गई पॉलिसी) भी बाहर होते हैं। पॉलिसी खरीदने के बाद 15 दिन का फ्री-लुक पीरियड मिलता है — इस दौरान शर्तें पढ़कर चाहें तो पॉलिसी वापस कर सकते हैं।

सबसे बड़ा नियम: ट्रिप बुक करते ही इंश्योरेंस ले लें — देरी से लेने पर कुछ कवर (जैसे ट्रिप कैंसिलेशन) मिलते ही नहीं। छोटा प्रीमियम, बड़ा सुकून।