अकेले घूमने का अपना मज़ा है — अपनी रफ्तार, अपनी मर्ज़ी। पर सोलो ट्रैवलर को सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भी खुद ही उठानी होती है। थोड़ी तैयारी के साथ सोलो ट्रिप उतनी ही सुरक्षित हो सकती है जितनी ग्रुप ट्रिप — डर नहीं, प्लानिंग चाहिए। ये रहे 12 आज़माए हुए टिप्स।

रिसर्च: डेस्टिनेशन को पहले से जानें

जाने से पहले इलाके के सेफ और असेफ ज़ोन, लोकल स्कैम और इमरजेंसी नंबर नोट कर लें। हाल की ट्रैवलर रिव्यू पढ़ें — खासकर सोलो ट्रैवलर्स की। जिस शहर के बारे में पहले से जानते हैं, वहां स्कैमर्स समझदार लोगों से दूर रहते हैं।

ठहरने की जगह सोचकर चुनें

सेंट्रल लोकेशन वाला, अच्छे रिव्यू वाला होटल या हॉस्टल चुनें — सस्ते के चक्कर में सुनसान इलाका न लें। चेक-इन पर कमरे का लॉक और सेफ्टी चेन जांचें। रात को देर से पहुंचने वाली फ्लाइट हो तो पहले से टैक्सी बुक रखें — अनजान शहर में आधी रात को टैक्सी ढूंढना सबसे बड़ा रिस्क है।

दस्तावेज़ों की डिजिटल कॉपी रखें

पासपोर्ट, वीज़ा, टिकट और इंश्योरेंस की स्कैन कॉपी ईमेल और क्लाउड दोनों में सेव रखें। असली दस्तावेज़ होटल के लॉकर में, फोटोकॉपी जेब में। दस्तावेज़ खोने पर डिजिटल कॉपी ही एंबेसी और एयरलाइन में सबसे तेज़ काम आती है। यह पांच मिनट का काम है।

किसी को अपना प्लान बताकर जाएं

रोज़ का मोटा प्लान — कहां रुकेंगे, कब कहां जाएंगे — घर पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति को भेजें। रोज़ एक मैसेज या लोकेशन शेयर करने की आदत डालें। कोई जानता हो कि आप कहां हैं — यही सोलो ट्रैवल की सबसे सस्ती और सबसे मजबूत सुरक्षा है। फोन में इमरजेंसी कॉन्टैक्ट सेट रखें।

पैसे और कीमती सामान बांटकर रखें

सारा कैश एक जगह न रखें — कुछ वॉलेट में, कुछ होटल लॉकर में, इमरजेंसी नोट जूते या बेल्ट में। महंगे गैजेट दिखावे से बचें और बैग हमेशा आगे की ओर रखें। चोर उसी को निशाना बनाता है जो आसान शिकार लगे — बंटा हुआ सामान और सादा अंदाज़ आपको मुश्किल टारगेट बनाता है।

अपनी instincts पर भरोसा करें

कोई जगह, टैक्सी या व्यक्ति अजीब लगे तो बिना झिझक वहां से निकल जाएं — शिष्टाचार से ज्यादा जरूरी सुरक्षा है। रात को सुनसान गलियों से बचें और नशे में अपरिचितों पर भरोसा न करें। अगर अंदर से कुछ "ठीक नहीं" लग रहा है, तो वह आमतौर पर ठीक नहीं होता — अपनी सूझ पर भरोसा करें। ट्रैवल इंश्योरेंस ज़रूर लें।