रोबोट वैक्यूम अब लग्ज़री नहीं, बिज़ी घरों और पालतू जानवरों वालों के लिए रोज़मर्रा की ज़रूरत बनता जा रहा है। 2026 के मॉडल खुद खाली होते हैं, फर्श का नक्शा बनाते हैं और पोछा भी लगाते हैं। लेकिन हर घर के लिए सही मॉडल अलग है — यहां चुनने की समझदारी भरी गाइड है।
चुनते वक्त 4 चीज़ें देखें
सक्शन पावर (कारपेट के लिए 4000Pa से ऊपर), LiDAR मैपिंग (कमरों का सही नक्शा और नो-गो ज़ोन), मोपिंग (टाइल/मार्बल घरों के लिए ज़रूरी), और पेट हेयर हैंडलिंग (उलझने-रोधी ब्रश)। सस्ते रैंडम-नेविगेशन वाले मॉडल दीवारों से टकराते फिरते हैं — थोड़े ज़्यादा पैसे में LiDAR वाला लें, फर्क दिन-रात का है।
बजट के हिसाब से 7 पिक्स
एंट्री लेवल (15-20 हज़ार): बेसिक LiDAR मॉडल छोटे फ्लैट्स के लिए काफी। मिड-रेंज (25-40 हज़ार): सेल्फ-एम्प्टिंग डॉक वाले मॉडल — हफ्तों तक डस्टबिन खाली करने की झंझट खत्म। प्रीमियम (50 हज़ार+): मोप वॉशिंग डॉक, AI ऑब्स्टेकल अवॉइडेंस (जूतों और तारों से बचता है), और पेट-फ्रेंडली मोड। पालतू जानवर हैं तो मिड-रेंज से नीचे न जाएं।
भारतीय घरों के लिए खास टिप्स
धूल ज़्यादा होती है तो हफ़्ते में 2 बार फिल्टर साफ़ करें, वरना सक्शन आधी हो जाती है। दहलीज़ (threshold) ऊंची हो तो रैंप लगाएं — ज़्यादातर रोबोट 2cm से ऊंची बाधा नहीं चढ़ते। पूजा के दिए और छोटे खिलौने फर्श से हटाकर ही रोबोट चलाएं।
मेंटेनेंस: लंबी उम्र का राज़
ब्रश में फंसे बाल हर हफ़्ते निकालें, मोप पैड हर 2-3 महीने में बदलें, और सेंसर को सूखे कपड़े से पोंछें। सॉफ्टवेयर अपडेट्स नज़रअंदाज़ न करें — कंपनियां मैपिंग और बैटरी मैनेजमेंट अपडेट्स से ही सुधारती हैं। सही देखभाल पर एक अच्छा रोबोट 4-5 साल आराम से चलता है।