बिखरी हुई पैंट्री में चीज़ें ढूंढने में वक्त बर्बाद होता है, एक्सपायर्ड सामान पड़ा रहता है और एक ही चीज़ दो बार खरीद ली जाती है। थोड़ी सी प्लानिंग से आपकी पैंट्री किराना दुकान जैसी व्यवस्थित हो सकती है। ऑर्गनाइज़्ड पैंट्री का सबसे बड़ा फायदा है — पैसे की बचत और रोज़ का तनाव कम।
पहले डिक्लटर करें
सब कुछ बाहर निकालें, एक्सपायर्ड और बेकार सामान फेंकें, और बची चीज़ों को कैटेगरी में बांटें। जो चीज़ पिछले 6 महीने में इस्तेमाल नहीं हुई, उसे दान कर दें या हटा दें — जगह ही असली खज़ाना है।
ज़ोनिंग: चीज़ों को ग्रुप में रखें
मसालों का एक ज़ोन, नाश्ते का एक ज़ोन, बेकिंग का एक ज़ोन — ग्रुपिंग से हर चीज़ एक नज़र में मिलती है। रोज़ इस्तेमाल होने वाली चीज़ें आंखों के लेवल पर रखें और कम इस्तेमाल वाली ऊपर या नीचे — यही ज़ोनिंग का सुनहरा नियम है।
साफ़ जार और लेबलिंग
पारदर्शी एयरटाइट जार में अनाज और दालें रखें — दिखेगा भी और ताज़ा भी रहेगा। हर जार पर नाम और तारीख का लेबल लगाएं। लेबलिंग वह छोटा कदम है जो पैंट्री को हमेशा व्यवस्थित रखता है, चाहे घर में कोई भी सामान निकाले।
वर्टिकल स्पेस का इस्तेमाल
शेल्फ राइज़र, दरवाज़े के पीछे हुक और स्टैकेबल बास्केट से छोटी पैंट्री में भी दोगुनी जगह बनाई जा सकती है। ऊपर की खाली जगह सबसे ज़्यादा बर्बाद होती है — स्टैकेबल कंटेनर से उसे काम में लाएं।
एक्सपायरी ट्रैकिंग
नई खरीद को पीछे और पुरानी को आगे रखें — यही "फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट" का नियम है। जल्दी एक्सपायर होने वाली चीज़ों को एक "पहले इस्तेमाल करें" बास्केट में रखें — बर्बादी लगभग खत्म हो जाएगी।
बजट में ऑर्गनाइज़िंग
महंगे ऑर्गनाइज़र ज़रूरी नहीं — पुराने डिब्बे, जार और टोकरियां भी काम आती हैं। पहले अपने पास मौजूद चीज़ों से शुरुआत करें, फिर ज़रूरत के हिसाब से ही नया खरीदें — स्मार्ट ऑर्गनाइज़िंग का यही मतलब है।