क्रिकेट के उभार से पहले पाकिस्तान एक और खेल में पूरी तरह राज करता था। 1960 से 1990 के दशक तक ग्रीन शर्ट्स फील्ड हॉकी के निर्विवाद बादशाह थे।
कौशल पर बना साम्राज्य
1960, 1968 और 1984 में ओलंपिक स्वर्ण और रिकॉर्ड चार हॉकी वर्ल्ड कप (1971, 1978, 1982, 1994)। उनकी कलाकारी — ड्रिब्लिंग, रिवर्स हिट, पेनल्टी कॉर्नर — ने हॉकी को खूबसूरत बनाया।
जादूगर
समीउल्लाह खान — 'उड़ता घोड़ा'; हसन सरदार — संपूर्ण सेंटर-फॉरवर्ड; शाहबाज़ अहमद — शायद इतिहास के सबसे बड़े ड्रिबलर; सोहेल अब्बास — ड्रैग-फ्लिक के बादशाह। ये खिलाड़ी नहीं, कलाकार थे।
विरासत
1984 लॉस एंजिल्स स्वर्ण और 1994 सिडनी वर्ल्ड कप साम्राज्य की आखिरी शान थे। स्वर्ण युग याद रखने लायक है — और हॉकी पुनरुत्थान की हकदार।
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