आपका घर शायद आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है, फिर भी बहुत से लोग इसे बिना बीमा के छोड़ देते हैं। आग, चोरी, बाढ़ या तूफान — एक ही हादसा सालों की बचत मिटा सकता है। होम इंश्योरेंस इस खतरे को सालाना छोटे प्रीमियम में बदल देता है।

क्या-क्या कवर होता है?

आम पॉलिसी में दो हिस्से होते हैं: घर की संरचना (दीवारें, छत, फिक्स्चर) और घर का सामान (फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स, गहने — एक सीमा तक)। आग, बिजली गिरना, चोरी, तोड़फोड़ और प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप या बाढ़ (अलग राइडर के साथ) कवर होते हैं। पॉलिसी के "एक्सक्लूज़न" ज़रूर पढ़ें — जो लिखा नहीं, वह कवर नहीं।

कितना कवर चाहिए?

घर की कीमत (जमीन हटाकर) के बराबर सम इंश्योर्ड लें — इतना कि घर दोबारा बन सके। सामान का अनुमान लगाकर उसकी लिस्ट बनाएं; अंदाज़ा अक्सर असलियत से कम होता है। कम कवर लेकर प्रीमियम बचाना बेवकूफी है — क्लेम के समय नुकसान कई गुना ज़्यादा होगा।

प्रीमियम कम करने के तरीके

डिडक्टिबल (आपकी जेब से जाने वाली राशि) बढ़ाने पर प्रीमियम घटता है — बस इतना रखें कि इमरजेंसी में चुका सकें। सिक्योरिटी सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर और अच्छी ताले वाली खिड़कियां भी छूट दिलाती हैं। एक ही कंपनी से होम और व्हीकल इंश्योरेंस लेने पर बंडल डिस्काउंट मिलता है।

क्लेम के समय क्या करें?

नुकसान की तुरंत फोटो-वीडियो बनाएं, पुलिस रिपोर्ट (चोरी के मामले में) दर्ज करें और 24-48 घंटे में कंपनी को सूचना दें। सर्वेयर आने से पहले टूटा सामान फेंके नहीं — वही आपका सबूत है। सारे बिल और रसीदें संभालकर रखें।

याद रखें: सस्ती पॉलिसी नहीं, सही कवर वाली पॉलिसी चुनें। साल में एक बार कवर रिव्यू करें — घर में नया सामान आया या रिनोवेशन हुआ, तो सम इंश्योर्ड बढ़ाना न भूलें।