अचानक नौकरी चली जाए, मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या घर की बड़ी मरम्मत पड़ जाए — ऐसे समय में इमरजेंसी फंड ही आपका सबसे बड़ा सहारा होता है। 2026 में बढ़ती महंगाई के बीच यह फंड पहले से ज़्यादा ज़रूरी हो गया है। अच्छी खबर यह है कि इसे बनाना मुश्किल नहीं, बस सही तरीके और थोड़े अनुशासन की ज़रूरत है।

कितना फंड होना चाहिए

सुनहरा नियम है — अपने 3 से 6 महीने के ज़रूरी खर्च के बराबर रकम अलग रखें। अगर आपका मासिक खर्च 30,000 रुपये है तो 90,000 से 1,80,000 रुपये का फंड लक्ष्य रखें। नौकरी अस्थिर हो या फ्रीलांसर हों तो 6 महीने का लक्ष्य बेहतर है। छोटी शुरुआत भी कोई शुरुआत न होने से बेहतर है — पहले 1 महीने के खर्च का लक्ष्य रखें।

हर महीने ऑटो-सेविंग सेट करें

सैलरी आते ही एक तय रकम अलग खाते में ऑटो-ट्रांसफर कर दें — जो दिखता नहीं, वह खर्च नहीं होता। शुरुआत में आय का 10% रखें, फिर धीरे-धीरे बढ़ाएं। बचत को खर्च के बाद बची रकम न समझें, उसे महीने का पहला खर्च समझें। यह एक मानसिक बदलाव है जो फंड को तेज़ी से बढ़ाता है।

फंड को सही जगह रखें

इमरजेंसी फंड न तो रोज़ के खर्च वाले खाते में होना चाहिए, न ही लंबे लॉक-इन वाली स्कीम में। हाई-इंटरेस्ट सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड सबसे अच्छे विकल्प हैं — पैसा तुरंत मिले और थोड़ा ब्याज भी मिले। फंड ऐसी जगह रखें जहां से निकालना आसान हो, लेकिन खर्च करना मुश्किल लगे। अलग खाता इसीलिए ज़रूरी है।

इमरजेंसी की परिभाषा तय करें

फंड सिर्फ असली इमरजेंसी के लिए है — नौकरी जाना, इलाज, ज़रूरी मरम्मत। नया फोन, शादी का खर्च या सेल में शॉपिंग इमरजेंसी नहीं है। पहले से तय कर लें कि किन हालात में पैसा निकालेंगे। जो फंड हर खुशी के मौके पर खर्च हो जाए, वह इमरजेंसी फंड नहीं रहता। इस्तेमाल के बाद उसे दोबारा भरने की योजना भी बनाएं।

फंड को समय-समय पर बढ़ाते रहें

महंगाई बढ़ने पर आपका मासिक खर्च भी बढ़ता है — इसलिए हर साल फंड की समीक्षा करें और लक्ष्य अपडेट करें। सैलरी बढ़े तो बचत का प्रतिशत भी बढ़ाएं। इमरजेंसी फंड एक बार का काम नहीं, ज़िंदगी भर की आदत है। 2026 में इसे अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग की नींव बनाएं।

इमरजेंसी फंड अमीरों की विलासिता नहीं, हर परिवार की ज़रूरत है। आज ही छोटी रकम से शुरुआत करें — भविष्य का आप खुद का शुक्रिया अदा करेगा।