सही लगे पर्दे कमरे को बड़ा और महँगा दिखाते हैं; ग़लत लगे पर्दे सबसे सुंदर कमरे को भी बिगाड़ देते हैं। फ़र्क़ सिर्फ़ माप और रॉड की पोज़िशन का है — यह काम आप ख़ुद कर सकते हैं। सबसे अहम नियम: रॉड को खिड़की के फ़्रेम पर नहीं, उससे ऊपर और चौड़ा लगाएँ।
1. रॉड की सही ऊँचाई और चौड़ाई
रॉड को खिड़की के फ़्रेम से 10–15 सेमी ऊपर और दोनों तरफ़ 10–15 सेमी चौड़ा लगाएँ — इससे खिड़की बड़ी लगती है। रॉड नीचे लगाने से कमरा छोटा और दबा हुआ दिखता है; ऊँचा रॉड ही प्रो लुक देता है।
2. पर्दे की लंबाई का माप
रॉड से फ़र्श तक मापें; पर्दा फ़र्श को हल्का छूता हुआ सबसे अच्छा लगता है। खिड़की तक की लंबाई वाले पर्दे रसोई-बाथरूम के लिए ठीक हैं। माप दो बार लें, पर्दा एक बार ख़रीदें — ग़लत लंबाई ठीक नहीं होती।
3. चौड़ाई: फ़ुलनेस का नियम
पर्दे की कुल चौड़ाई रॉड की लंबाई से 1.5–2 गुना होनी चाहिए ताकि खूबसूरत चुन्नटें बनें। पतले, तने हुए पर्दे सस्ते लगते हैं; भरपूर फ़ैब्रिक ही अमीर लुक देता है।
4. ब्रैकेट माउंट करना
पेंसिल से निशान लगाएँ, लेवल से सीध चेक करें, फिर ड्रिल से पायलट होल करके स्क्रू लगाएँ। खोखली दीवार में एंकर प्लग ज़रूर इस्तेमाल करें। बिना लेवल के लगाया रॉड टेढ़ा दिखेगा — 2 मिनट का लेवल चेक ज़रूरी है।
5. पर्दे की स्टाइल चुनें
आईलेट पर्दे आधुनिक और लगाने में आसान; प्लीटेड पर्दे फ़ॉर्मल लुक देते हैं। हल्के रंग कमरे को हवादार दिखाते हैं। कमरे के फ़र्नीचर से एक शेड गहरा या हल्का रंग चुनें — कंट्रास्ट ही सुंदरता है।
6. फ़िनिशिंग टच
पर्दे लगाकर एक बार स्टीम आयरन करें, टाई-बैक से दिन में रोशनी आने दें। बिना प्रेस किए पर्दे अधूरे लगते हैं; स्टीमिंग 5 मिनट का काम है।
7. डबल रॉड और लेयरिंग
शीअर (पतला) पर्दा और भारी पर्दा दोनों चाहिए तो डबल रॉड लगाएँ — दिन में रोशनी, रात में प्राइवेसी। लेयरिंग से कमरा होटल जैसा लग्ज़री दिखता है और रोशनी का पूरा कंट्रोल मिलता है।