पहचान चोरी में ठग आपके नाम पर लोन या क्रेडिट कार्ड ले लेते हैं — और आपको पता भी नहीं चलता। क्रेडिट फ्रीज़ इस धोखाधड़ी का सबसे मज़बूत बचाव है: यह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट को लॉक कर देता है ताकि कोई नया खाता न खोल सके। आइए जानें यह कैसे काम करता है।

क्रेडिट फ्रीज़ कैसे काम करता है?

फ्रीज़ लगाने के बाद कोई भी लेंडर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट नहीं देख सकता — और बिना रिपोर्ट देखे नया लोन या कार्ड जारी नहीं होता। आपका मौजूदा क्रेडिट, EMI और स्कोर सामान्य चलते रहते हैं। फ्रीज़ आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान नहीं पहुंचाता — यह सिर्फ़ नई जांच रोकता है।

फ्रीज़ कैसे लगाएं: स्टेप-बाय-स्टेप

भारत में CIBIL, Experian, Equifax और CRIF — इन चारों ब्यूरो से अलग-अलग संपर्क करना होता है। हर ब्यूरो की वेबसाइट या ऐप पर जाएं, पहचान सत्यापित करें, और फ्रीज़ का विकल्प चुनें। प्रक्रिया मुफ़्त है और कुछ मिनट में पूरी होती है। सिर्फ़ एक ब्यूरो पर फ्रीज़ काफी नहीं — चारों पर लगाएं, वरना ठग दूसरे ब्यूरो से रास्ता निकाल लेंगे।

खुद लोन लेना हो तो क्या करें?

जब आपको खुद लोन या कार्ड चाहिए, तो फ्रीज़ को अस्थायी रूप से हटाएं (थॉ) — कुछ घंटों या दिनों के लिए। काम होते ही दोबारा फ्रीज़ लगा दें। थॉ की अवधि पहले से तय करें — खुला फ्रीज़ भूलना सुरक्षा में छेद है।

कब फ्रीज़ ज़रूरी है?

अगर आपका पैन, आधार या बैंक डिटेल लीक हुआ हो, अजीब OTP आए हों, या क्रेडिट रिपोर्ट में अनजान खाता दिखे — तुरंत फ्रीज़ लगाएं। नियमित रूप से साल में एक बार मुफ़्त क्रेडिट रिपोर्ट जांचें। संदिग्ध गतिविधि दिखते ही पहले फ्रीज़ लगाएं, फिर जांच करें — क्रम उल्टा न हो।

क्रेडिट फ्रीज़ मुफ़्त, आसान और असरदार सुरक्षा है। आज ही चारों ब्यूरो पर फ्रीज़ लगाएं — पहचान चोरों के लिए दरवाज़ा बंद कर दें।