नई कार की कीमतें आसमान छू रही हैं, इसलिए समझदार खरीदार पुरानी कार की ओर देख रहे हैं। लेकिन सेकंड-हैंड बाज़ार में अच्छी डील और महंगा धोखा — दोनों मिलते हैं। ये चेकलिस्ट आपको सही कार चुनने और बुरे सौदे से बचने में मदद करेगी।

बजट पहले, कार बाद में

कार की कीमत के अलावा रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर, इंश्योरेंस, तुरंत सर्विसिंग और छोटी-मोटी मरम्मत का खर्च भी जोड़ें — आमतौर पर कीमत का 10-15% एक्स्ट्रा रखें। लोन ले रहे हैं तो पुरानी कार पर ब्याज दर ज़्यादा होती है, ये पहले ही पता कर लें।

कागज़ात की पूरी जांच

कार देखने से पहले RC, इंश्योरेंस, PUC और सर्विस हिस्ट्री मांगें। इंजन और चेसिस नंबर RC से मैच करें, और चालान/लोन का बकाया ऑनलाइन चेक करें। "फर्स्ट ओनर" का दावा विज्ञापन में आम है — RC पर असलियत दिखती है।

कार का फिज़िकल इंस्पेक्शन

दिन के उजाले में कार देखें। असमान पेंट, दरवाज़ों के गैप और डिक्की के नीचे जंग — एक्सीडेंट के निशान हो सकते हैं। टायरों की घिसावट, सभी लाइटें, AC, पावर विंडो और इलेक्ट्रॉनिक्स टेस्ट करें। इंजन स्टार्ट करके अजीब आवाज़ सुनें।

टेस्ट ड्राइव और मैकेनिक की राय

कम से कम 15-20 मिनट की टेस्ट ड्राइव लें — शहर और हाईवे दोनों पर। स्टीयरिंग का खिंचाव, ब्रेकिंग, गियर शिफ्ट और सस्पेंशन की आवाज़ नोट करें। सबसे ज़रूरी: अपने भरोसेमंद मैकेनिक से इंस्पेक्शन करवाएं — 500-1000 रुपये की फीस लाखों बचा सकती है।

कीमत पर मोलभाव

ऑनलाइन प्राइस गाइड से मार्केट रेट पता करें। मिली खामियां (टायर बदलने हैं, सर्विस ड्यू है) मोलभाव का हथियार हैं — हर खामी की मरम्मत लागत निकाल कर ऑफर घटाएं। जल्दबाज़ी न करें; अच्छी डील धैर्य मांगती है।

डीलर vs प्राइवेट सेलर

डीलर से खरीदने पर थोड़ी वारंटी और कागज़ी सहूलियत मिलती है, पर कीमत ज़्यादा होती है। प्राइवेट सेलर से सस्ती डील मिल सकती है, पर सारा रिस्क आपका। चाहे जिससे लें — मैकेनिक इंस्पेक्शन और पेमेंट का लिखित सबूत कभी न छोड़ें।