रोज़ शाम को "आज क्या बनेगा?" की टेंशन और फिर बाहर से मंगवाना — यह चक्र पैसे और सेहत दोनों खाता है। बैच कुकिंग का मतलब है हफ़्ते में एक दिन 2–3 घंटे पकाना और बाकी दिन सिर्फ़ गरम करके खाना। थोड़ी प्लानिंग से घर का ताज़ा खाना रोज़ मिलता है, बिना रोज़ की झंझट।
पहले हफ़्ते का मेन्यू तय कीजिए
बिना प्लान के पकाना बर्बादी है। रविवार को 10 मिनट बैठकर 5–6 डिनर तय कीजिए — ऐसे खाने जो दोबारा गरम करने पर भी स्वादिष्ट रहें, जैसे दाल, राजमा, छोले, सब्ज़ी और चावल। नाश्ते के लिए ओट्स या पराठे का आटा पहले से तैयार रखिए। मेन्यू फ्रिज पर चिपका दीजिए ताकि सबको पता रहे।
एक ही बार स्मार्ट खरीदारी कीजिए
मेन्यू के हिसाब से पूरी सूची बनाइए और हफ़्ते में सिर्फ़ एक बार बाज़ार जाइए — बार-बार जाने पर फालतू सामान भी आ जाता है। दालें, चावल और मसाले थोक में सस्ते पड़ते हैं। सब्ज़ियां 3–4 दिन की ही लीजिए ताकि ताज़ा रहें; पत्तेदार सब्ज़ियां गीले कपड़े में लपेटकर रखिए।
एक ही दिन में सब पकाइए
कुकिंग डे पर एक साथ कई काम कीजिए: एक तरफ दाल उबल रही हो, दूसरी तरफ सब्ज़ी कट रही हो और तीसरी तरफ आटा गूंथ रहा हो — इसे "असेंबली लाइन" तरीका कहते हैं। पहले वे चीज़ें बनाइए जो ज़्यादा समय लेती हैं। पकाते समय बर्तन धोते जाइए ताकि अंत में ढेर न लगे। 2–3 घंटे में पूरे हफ़्ते का खाना तैयार हो जाता है।
सही डिब्बों में सही तरीके से रखिए
खाना 2 घंटे के अंदर ठंडा करके एयरटाइट डिब्बों में फ्रिज में रखिए — कमरे के तापमान पर ज़्यादा देर रखना खतरनाक है। हर डिब्बे पर तारीख का स्टिकर लगाइए; पका खाना फ्रिज में 3–4 दिन और फ्रीज़र में एक महीना चलता है। चावल और दाल अलग-अलग डिब्बों में रखिए ताकि ज़रूरत के हिसाब से निकाला जा सके।
खाने में विविधता बनाए रखिए
रोज़ एक जैसा खाना बोरियत लाता है। एक ही दाल को अलग-अलग दिन तड़का बदलकर, या चावल को कभी फ्राइड राइस बनाकर नया स्वाद दीजिए। चटनी, अचार और सलाद रोज़ ताज़ा बनाइए — ये 5 मिनट में तैयार होते हैं और खाने को नया बना देते हैं। हफ़्ते में एक दिन "फ्री डे" रखिए जब मनचाहा खाएं।